🌸 अनजानी से अपनापन तक 🤍 कभी-कभी ज़िंदगी बिना कोई दस्तक दिए किसी ऐसे इंसान से मिला देती है, जिसकी कल्पना भी नहीं की होती। मेरी कहानी भी कुछ ऐसी ही है। वह एक अजनबी थी… नाम जानता था, मगर उसे नहीं। एक साधारण-सी मुलाक़ात हुई, फिर कुछ छोटी-छोटी बातें। पता ही नहीं चला कि कब उसकी मुस्कान मेरे दिन का सबसे खूबसूरत हिस्सा बन गई। उसके आने के बाद रास्ते वही रहे, मगर सफ़र बदल गया। पहले जहाँ हर मंज़िल दूर लगती थी, अब हर कदम आसान लगने लगा। जैसे किसी ने थके हुए मन को नई हिम्मत दे दी हो। अक्सर सोचता हूँ, आख़िर ऐसा क्यों लगा कि मैं उसे बरसों से जानता हूँ? क्यों उसकी हर बात इतनी अपनी-सी लगी? शायद कुछ रिश्ते पहचान से नहीं, एहसास से बनते हैं। कुछ लोग पहली बार मिलकर भी बरसों पुराने लगते हैं। वह सिर्फ़ एक दोस्त नहीं बनी, बल्कि मेरी मुस्कानों की वजह बन गई। उसकी बातें आज भी मन में वैसे ही गूँजती हैं, जैसे शांत रात में कोई मीठी धुन। अब समझ आया कि हर रिश्ता ख़ून या वर्षों की पहचान से नहीं बनता। कुछ लोग अचानक ज़िंदगी में आते हैं और ऐसा अपनापन दे जाते हैं कि लगता है जैसे उनसे कोई बहुत गहरा नाता पहले से ही रहा हो।...
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